Sat. Feb 16th, 2019

किसान के बेटे का कमाल कोलगेट

एक साधारण किसान का बेटा क्या कमाल कर सकता है, इसकी मिसाल है कोलगेट पामोलिव कंपनी का इतिहास। दुनिया की सर्वाधिक प्रतिष्ठत कंपनियों में से एक कोलगेट की 200 साल पुरानी कहानी एक ऐसे परिवार की कथा है जिसने वाकई शून्य से सफर शुरू किया और उन शिखरों को छुआ, जो अनिर्मित और अविजित थे। कंपनी के ब्रांड से पहले आइए, इसके संस्थापक को जानें। इसके लिए हमें 18वीं सदी के ग्रेट ब्रिटेन की काउंटी ऑफ कैंट के हुलिंगबर्न में रहनेवाले रॉबर्ट कोलगेट परिवार के बारे में जानना होगा। 25 जनवरी, 1783 को यहाँ रहनेवाले किसान रॉबर्ट कोलगेट के घर में जनमे पुत्र विलियम कोलगेट ने बचपन से ही वे सारे सबक सीख लिये थे, जो एक महान जीवन का आधार बन सकते हैं। पेशे से किसान विलियम पिता राजनीति में भी दिलचस्पी रखते थे । वह अमेरिका की आजाद नीतियों के कट्टर समर्थक थे और फ्रांस की क्रांतिकारी नीतियों में दिलचस्पी रखते थे। एक दौर ऐसा भी आया जब उनकी इस राजनीतिक सक्रियता के कारण उन्हें अपना देश हमेशा के लिए छोड़कर अमेरिका पलायन करना पड़ा। 1798 में जब कोलगेट परिवार अमेरिका के मैरीलैंड के हार्टफोर्ड के एक फार्म हाउस में बसने लगा तब विलियम 15 साल के थे। यहाँ जड़ें जमाने में परिवार को काफी समय लगा। पिता चाहकर भी परिवार को संतुष्ट नहीं कर पा रहे थे। हालात गरीबी के थे। विलियम वयस्क हुए तो उन्होंने जिम्मेदारियाँ सँभालने की जिद में न्यूयॉर्क की राह पकड़ ली।

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विलियम कोलगेट ने बचपन से ही वे सारे सबक सीख लिये थे, जो एक महान जीवन का आधार बन सकते हैं। पेशे से किसान विलियम पिता राजनीति में भी दिलचस्पी रखते थे । वह अमेरिका की आजाद नीतियों के कट्टर समर्थक थे और फ्रांस की क्रांतिकारी नीतियों में दिलचस्पी रखते थे। एक दौर ऐसा भी आया जब उनकी इस राजनीतिक सक्रियता के कारण उन्हें अपना देश हमेशा के लिए छोड़कर अमेरिका पलायन करना पड़ा। 1798 में जब कोलगेट परिवार अमेरिका के मैरीलैंड के हार्टफोर्ड के एक फार्म हाउस में बसने लगा तब विलियम 15 साल के थे। यहाँ जड़ें जमाने में परिवार को काफी समय लगा। पिता चाहकर भी परिवार को संतुष्ट नहीं कर पा रहे थे। हालात गरीबी के थे। विलियम वयस्क हुए तो उन्होंने जिम्मेदारियाँ सँभालने की जिद में न्यूयॉर्क की राह पकड़ ली।

1804 में 21 वर्ष के विलियम एक सपने के साथ न्यूयॉर्क आ गए। विलियम ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए थे और इस वजह से नौकरी करना उनकी सोच से बाहर का था। उस पर न्यूयॉर्क जैसा बड़ा शहर उन्हें आसानी से रास नहीं आ रहा था। उन्होंने पिता को हमेशा उद्यम करते देखा और चाहते थे कि वह भी ऐसा ही करे।

न्यूयॉर्क में उन्होंने एक साबुन निर्माता (सोप-बॉयलर) के यहाँ बतौर प्रशिक्षु कॅरियर शुरू किया। वह उत्साह से भरे हुए थे और साबुन उत्पादन तकनीकों को बारीकी से सीखकर भविष्य की संभावनाओं को आधार दे रहे थे। यह सब सीखने के साथ-साथ वे अपने मैनेजमेंट की उन खामियों को भी समझ रहे थे जो वह दोहराना नहीं चाहते थे। उनके दिमाग में खुद की फैक्टरी व दुकान स्थापित करने का विचार पनपने लगा। उन्होंने बहुत जल्दी साबुन उद्योग के गुर व बाजार को समझकर अन्य शहरों के डीलरों से संपर्क बना लिये।

दो साल बाद जैसे ही उनका प्रशिक्षण समाप्त हुआ, उन्होंने न्यूयॉर्क शहर की डच स्ट्रीट पर एक छोटी सी दुकान लेकर खुद के बनाए साबुन, स्टार्च और मोमबत्तियाँ बेचना शुरू कर दिया।

यह वह दौर था, जबकि बाकी दुनिया आजादी की लड़ाई लड़ रही थी तो अमेरिकी जनता सभ्यता के नए कायदे बना रही थी। यह उन नए उद्यमियों के लिए सुनहरा मौका था, जो संघर्ष से सफलता पाने में यकीन रखते थे। इन्हीं में से एक विलियम कोलगेट ने कारोबार को तेजी से विस्तार देना तय किया, ताकि बाजार पर पकड़ मजबूत हो सके। कारोबार के दूसरे ही साल में उन्होंने फ्रांसिस स्मिथ नाम के कारोबारी से साझेदारी की और अपनी नई कंपनी का नामकरण ‘स्मिथ एंड कोलगेट’ किया। यह साझेदारी सन् 1812 तक चली, क्योंकि बाद में कोलगेट ने स्मिथ की हिस्सेदारी खरीद ली। इसी समय विलियम ने अपने भाई बॉल्स कोलगेट को कारोबार से जोड़कर कंपनी का नाम विलियम कोलगेट एंड कंपनी रख दिया। कारोबार जम रहा था और कोलगेट के गुणवत्ता भरे उत्पादन बाजार में पसंद किए जा रहे थे। 1817 में कोलगेट ने अपना पहला विज्ञापन न्यूयॉर्क के अखबार में जारी किया, जिसका अच्छा रिस्पांस भी मिला। अब बड़ा विस्तार करने का समय आ चुका था और इसीलिए उन्होंने वर्ष 1820 में न्यूजर्सी में नई फैक्टरी स्थापित की। यहाँ कोलगेट के दो प्रमुख उत्पाद विंडसर टॉयलेट सोप व पर्ल स्टार्च बनने लगे। कारोबार अमेरिका के दूसरे शहरों में भी फैलने लगा । दोनों भाइयों के संयुक्त उद्यम ने पारिवारिक कारोबार को कॉर्पोरेट साँचे में ढालना शुरू किया, ताकि उनके बाद भी कंपनी ठीक तरह से प्रगति कर सके। सबकुछ ठीक चल रहा था कि अचानक 25 मार्च, 1857 को खबर मिली कि विलियम कोलगेट नहीं रहे। उनकी मौत का कारण सार्वजनिक नहीं किया गया, जो आज तक कोलगेट परिवार का राज बना हुआ है।

अब कंपनी की जिम्मेदारी विलियम के बड़े बेटे सैमुअल ने सँभाल ली। उनके निर्देशन में ही कंपनी ने अपने वैश्विक भविष्य और विस्तार की बुनियाद रखी। कंपनी का नया नामकरण कोलगेट एंड कोलगेट किया गया। सन् 1860 के दौरान कोलगेट ने नए उत्पाद लाने की रणनीति बनाई। काफी अध्ययन और अनुसंधान के बाद कोलगेट ने ऐसे उत्पाद बनाना और बेचना शुरू किया, जो रोजमर्रा के जीवन की खास जरूरत थे। कंपनी ने स्टार्च के कारोबार को बंद कर ओरल केअर पर ध्यान केंद्रित किया। इसी क्रम में कंपनी ने सन् 1866 में खुशबूदार साबुन, इत्र और 1873 में पहली बार टूथपेस्ट बाजार में उतारा, जो कि ट्यूब के बजाय एक जार में भरा था। कोलगेट के समानांतर कई अन्य कंपनियाँ भी एफएमसीजी मार्केट में पैठ बना रही थीं। इनमें से प्रमुख थी पामोलिव कंपनी, जो कि 1864 में अमेरिका के विस्कोंसिस प्रांत के मिलवऑकी में बीजे जॉंनसन ने स्थापित की थी। इसी तरह 1872 में पीट ब्रदर्स ने पारदर्शी साबुन बनाने के लिए एक सोप कंपनी स्थापित की और 1879 में न्यूजर्सी में मीनेन कंपनी स्थापित हुई। आगे चलकर अधिग्रहण-विलयन नीति के तहत ये तीनों कंपनियाँ कोलगेट के साथ मिला दीं। इस तरह इन-आर्गेनिक ग्रोथ करते हुए कोलगेट ने बहुत कम पूँजी की अपनी छोटी सी कंपनी को पूरे अमेरिका में फैला दिया। हालाँकि इस विस्तार में करीब 50 साल का समय लगा, लेकिन इस दौरान कोलगेट ने अपने प्रॉडक्ट पोर्टफोलियो को खासा बढ़ा लिया था। 1896 में कोलगेट ने टूथपेस्ट को ट्यूब में पैक करके बेचना शुरू किया। यह एक नई और बेहद सुविधाजनक ईजाद थी। बाजार में इसकी धूम मच गई और कोलगेट को बाजार में एक बड़ा हथियार मिल गया। सन् 1906 में जब कंपनी ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे किए तो इसके पोर्टफोलियो में 800 से ज्यादा प्रॉडक्ट थे। अब कंपनी की जिम्मेदारी सैमुअल कोलगेट के पाँच बेटे सँभाल रहे थे। जब कोलगेट ने पहली बार ट्यूब में टूथपेस्ट पेश किया तो उसका स्लोगन दिया गयाङ्त”We couldn’t improve the product so we improved the tube.”

बीसवीं सदी में कोलगेट ने वैश्विक विस्तार की नीतियों पर अमल शुरू किया। इसके लिए ऐसी नीतियाँ बनाई गईं जिससे कि कंपनी अच्छी ब्रांड इमेज के साथ सीधे कस्टमर से जुड़ सके। इसी क्रम में 1911 में कंपनी ने देश-विदेश के स्कूलों में 20 लाख टूथपेस्ट व ब्रश वितरित किए, ताकि नए कस्टमर उनका उपयोग सीख सकें। 1914 में कनाडा में पहली सब्सीडरी (सहायक कंपनी) स्थापित करके कोलगेट ने वैश्विक विस्तार आरंभ किया। अमेरिका के अनुभवों से सीखते हुए कंपनी ने प्रचार और मुफ्त उत्पाद की रणनीति को आगे बढ़ाया । इससे नए बाजार भी बने और नए उपभोक्ता भी जुड़े। खासियत यह थी कि इनमें वे प्रोडक्ट शामिल थे, जो रोजमर्रा के उपयोग में आनेवाली पारंपरिक चीजें थीं। 1920 में कोलगेट ने यूरोप, एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में बड़े विस्तार के लिए कदम बढ़ाए। जल्दी ही कंपनी ने ऐसी दर्जनों छोटी कंपनियों को अधिग्रहित कर लिया जो उभरते बाजारों में पैर जमा रही थीं। पूँजी जुटाने के उद्देश्य से 1930 में कोलगेट न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हुई। इसी दौरान कंपनी ने भारत जैसे देशों में विस्तार किया। भारत में कंपनी ने 1937 में प्रवेश किया और धीरे-धीरे इसी देश की बनकर रह गई। नई पीढ़ी तो कोलगेट को देसी कंपनी ही मानती है। बीसवीं सदी के मध्य तक कोलगेट को टक्कर देनेवाले कई प्रतिद्वंद्वी मैदान में जम गए थे। इनमें से एक थी अमेरिकी कंपनी प्रॉक्टर ऐंड गैंबल, जो कोलगेट के लिए चुनौती बनी हुई है।

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद कोलगेट के कारोबार ने तेजी से जड़ें जमाईं। कंपनी ने सारे ऑपरेशन 300, पार्क एवेन्यू, न्यूयॉर्क सिटी से संचालित करते हुए कंपनी व कारोबार का प्रबंधन पुनर्गठित किया। 1953 में औपचारिक विलय के बाद कंपनी का नया नाम कोलगेट-पामोलिव हो गया, जो आज तक बना हुआ है। फैब डिटर्जेंट, अजाक्स क्लिंजर, कोल्ड पॉवर लॉंड्री डिटर्जेंट, पामोलिव डिशवाशिंग लिक्विड, अल्ट्रा ब्राइट टूथपेस्ट, बैगीज फूड व्रेप ऐसे कुछ उत्पादों के कारण 1970 तक कंपनी की वैश्विक बिक्री 1 अरब डॉलर तक पहुँच गई। 1970 के बाद डेविड फॉस्टर के निर्देशन में कोलगेट ने आक्रामक अधिग्रहण नीति अपनाते हुए ऐसी दर्जनों बड़ी कंपनियों को अधिग्रहित किया, जिसके कारण सैकड़ों उत्पाद कोलगेट के प्रोडक्ट्स पोर्टफोर्लियो का हिस्सा बन गए। सन् 1983 में कंपनी ने कोलगेट प्लस टूथब्रश बाजार में उतारा, जो बेहद सफल रहा। सन् 1990 के आते-आते कंपनी 5 अरब डॉलर की सालाना बिक्री करने लगी। हालाँकि इस दौरान कंपनी को कई बड़े उतार-चढ़ाव देखने पड़े, लेकिन उसकी साख बरकरार रही। बीसवीं सदी के अंतिम दशक में नए सीईओ रुबेन मार्क ने कंपनी को मंदी, गिरती बिक्री और गलाकाट प्रतिस्पर्धा से उबारने के लिए कई कठोर फैसले लिये। 1997 में कंपनी ने कोलगेट टोटल टूथपेस्ट के रूप में एक ऐसा उत्पाद पेश किया, जिसकी साख आज तक बनी हुई है। 13 अरब डॉलर से ज्यादा की सालाना बिक्री के साथ एफएमसीजी उत्पादों के लिए कोलगेट दुनिया के 200 से ज्यादा देशों के एक अरब से ज्यादा लोगों की पसंद है और हर दिन हजारों प्रशंसक इसकी विश लिस्ट में जुड़ते जा रहे हैं।

लॉर्ड गॉड के नाम दसवाँ हिस्सा

जब कोलगेट परिवार ब्रिटेन से पलायन कर अमेरिका में बसा तो उनके लिए जीवन-यापन बड़ा मुश्किल हो गया। परिवार को सँभालने के लिए जब विलियम कोलगेट न्यूयॉर्क जाने लगे तो उन्हें देने के लिए पिता के पास कुछ न था, लेकिन उनकी माँ मैरी ने उन्हें एक संकल्प दिलाया कि जो भी करो, उसमें परमपिता ईश्वर को साथ रखो। यहाँ तक कि मुनाफे में भी उसे अपना भागीदार बनाओ, तुम्हें सफलता जरूर मिलेगी। माँ की सीख पर चलते हुए विलियम ने जब साबुन की दुकान से पहला डॉलर कमाया तो उसका दसवाँ हिस्सा यानी 10 सेंट ईश्वर के नाम पर दान कर दिया। आगे जब कारोबार बढ़ा तो बाकायदा ईश्वर के नाम ‘लॉर्ड गॉड’ अकाउंट खोला। उनकी इसी आस्तिक शक्ति और परोपकारिता के कारण उन्हें अमेरिका के शीर्ष सुधारवादियों में शुमार किया गया है।

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Prakash Biyani

Author: Prakash Biyani

कॉरपोरेट इतिहासकार प्रकाश बियानी की यह ग्यारहवीं पुस्तक है। श्री बियानी की पूर्व प्रकाशित पुस्तकों में बहुपठित हैं—‘शून्य से शिखर’, ‘जी! वित्तमंत्री जी’, ‘इस्पात पुरुष लक्ष्मी मित्तल’, ‘इंडियन बिजनेस वुमेन’, ‘25 सुपर ब्रांड्स’ एवं ‘खदान से ख्वाबों तक संगमरमर’। बिजनेस वर्ल्ड पर हिंदी में पहली बार प्रकाशित इन पुस्तकों को प्रबुद्ध पाठकों, विशेषकर बी-स्कूल के छात्रों ने खूब सराहा है। उनकी पुस्तकों के गुजराती, मराठी संस्करण भी लोकप्रिय हुए हैं। ‌किशोर उम्र से लेखन कार्य कर रहे श्री बियानी ने 25 वर्ष (1968-93) भारतीय स्टेट बैंक में महत्वपूर्ण दायित्व सँभालने के बाद दस वर्ष (1994-2003) भास्कर समूह में कॉरपोरेट संपादक का दायित्व सँभाला है। उनके दो हजार से ज्यादा लेख, साक्षात्कार विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। सन् 2003 से फ्रीलांस लेखक के रूप में कार्यरत श्री बियानी विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं के निय‌िमत स्तंभ लेखक भी हैं।

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