Sat. Feb 16th, 2019

कतार से जनमा मैकडॉनल्ड्स

बड़े स्वप्न देखो, जोखिम उठाओ, पूरा दम लगाओ और अपने स्वप्न साकार करो।’ स्व. धीरूभाई अंबानी के इस अनुभव-सद्ध कथन का आशय है- अनूठी सफलता केवल अनूठे सोच से नहीं मिलती। शून्य से शिखर पर वे ही पहुँचते हैं, जिनके पास अपने सोच, अपने स्वप्न को विराट् रूप देने की मानसिकता होती है, क्योंकि शिखर पर पहुँचने से ज्यादा मुश्किल है शिखर पर बने रहना। फास्ट फूड रेस्त्राँ शृंखला मैकडॉनल्ड्स के जन्मदाता और इसे विश्वव्यापी बनानेवाले उद्यमियों की कहानी इस बात का प्रमाण है। अमेरिकन लाइफ स्टाइल के इस क्विक सर्विस रेस्त्राँ की दो सगे भाइयों रिचर्ड और मौरिक मैकडॉनल्ड ने शुरुआत की थी, पर वे बहुत कम में बहुत जल्दी संतुष्ट हो गए। फलतः इसके सुफल से वंचित रहे। एक साधारण पर अत्यंत महत्त्वाकांक्षी सेल्समैन ने उनके इस सोच का विराट् रूप देखा और फास्ट फूड के पितामह बनने के साथ मैकडॉनल्ड्स को विश्वव्यापी बनाने का श्रेय जुटाया। खूब पैसा व प्रतिष्ठा कमाई।

The McDonald’s Golden Arches logo was introduced in 1962. It was created by Jim Schindler to resemble new arch shaped signs on the sides of the restaurants. He merged the two golden arches together to form the famous ’M’ now recognized throughout the world. Schindler’s work was a development of the stylized ’v’ logo sketched by Fred Turner, which was conceived as a more stylish corporate symbol than the Speedee chef character that had previously been used. The McDonald’s name was added to the logo in 1968.

महत्त्वाकांक्षी सेल्समैन ने उनके इस सोच का विराट् रूप देखा और फास्ट फूड के पितामह बनने के साथ मैकडॉनल्ड्स को विश्वव्यापी बनाने का श्रेय जुटाया। खूब पैसा व प्रतिष्ठा कमाई।

मैकडॉनल्ड्स की कहानी सन् 1940 से शुरू होती है। मैकडॉनल्ड भाइयों ने लॉस एंजिल्स से 55 कि.मी. दूर सैन बरनार्डिनो में एक छोटा सा रेस्त्राँ खोला। सन् 1948 में उन्होंने यहाँ स्पीड सर्विस सिस्टम लागू किया, जिसने सारी दुनिया को फास्ट फूड रेस्त्राँ का सोच दिया। इस सिस्टम के तहत मैकडॉनल्ड भाइयों ने सेल्स स्टैंड लगाए थे जहाँ से लोग क्यू में खड़े होकर हैंबर्गर्स व फ्रेंच फ्राइज खरीदते थे। मल्टी मिक्सर मिल्क शेक मिक्सर्स का एक सेल्समैन रेमंड क्रॉक यह जानकर हैरान हुआ कि बरनार्डिनो स्थित छोटा सा रेस्त्राँ उसकी कंपनी का सबसे बड़ा ग्राहक है। क्रॉक इसका कारण जानने रेस्त्राँ पहुँचा तो उसने देखा कि मिल्क शेक व हैंबर्गर्स खरीदने के लिए ग्राहक क्यू में खड़े हुए हैं। मैकडॉनल्ड्स भाई एक बार में 40 मिल्क शेक बनाते हैं। वे एक मिनट में एक ग्राहक को बर्गर डिलीवर कर देते हैं। प्लास्टिक के बरतन व पेपर नैपकीन इस्तेमाल करते हैं। अतः बरतन उठाने व सफाई करने का झंझट नहीं है। क्रॉक के दिमाग में तत्काल खयाल आया कि फास्ट डिलीवरी का यह आइडिया सारे देश में लोकप्रिय होगा।

कामयाब रहा फ्रेंचाइजी का फंडा

क्रॉक ने मैकडॉनल्ड्स भाइयों को सारे देश में फास्ट डिलीवरी वाले फास्ट फूड रेस्त्राँ खोलने की सलाह दी, पर यह देखकर निराश हुआ कि उन्होंने कारोबार विस्तार में रुचि नहीं दिखाई। रेमंड क्रॉक ने दोनों भाइयों से कहा कि वे उसे अपना फ्रेंचाइजी नियुक्त कर दें। दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ कि क्रॉक कुल बिक्री का 1.4 फीसदी व मैकडॉनल्ड भाई 6.5 फीसदी प्राप्त करेंगेङ्तइन शर्तों पर समझौता हुआ। ’50 के दशक में यह अपने किस्म का पहला संयुक्त वेंचर था। इसके बाद 15 अप्रैल, 1955 को क्रॉक ने डेस लेंस (इलीनॉय) में पहला फ्रेंचाइजी रेस्त्राँ स्थापित किया, जहाँ लोगों की भीड़ जुटने लगी। मैकडॉनल्ड्स भाइयों के अल्पसंतोषी स्वभाव में क्रॉक ने अपने लिए बड़ी संभावना देखी और उनकी इक्विटी खरीदकर वे दुनिया के पहले फास्ट फूड रेस्त्राँ शृंखला के मालिक बन गए। सन् 1955 में अमेरिका में मैकडॉनल्ड्स कॉर्पोरेशन जनमा और जगह-जगह मैकडॉनल्ड्स रेस्त्राँ खुलने लगे।

1963 में इनकी संख्या 500 से ज्यादा हो गई। 1967 में रेमंड क्रॉक ने अमेरिकन सीमा लाँघकर कनाडा में रेस्त्राँ स्थापित किया। 1983 में 30 देशों में 7,500 से ज्यादा मैकडॉनल्ड्स रेस्त्राँ हो गए। सन् 1965 में क्रॉक ने मैकडॉनल्ड्स को पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनाया, जो आज कई देशों के स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध है। सन् 1984 में रेमंड क्रॉक का जब निधन हुआ, तब वे 50 करोड़ डॉलर संपदा के धनी थे; पर वे इस बात के लिए जाने जाते हैं कि 118 देशों में मैकडॉनल्ड्स के 31 हजार से ज्यादा रेस्त्राँ प्रतिदिन 6 करोड़ ग्राहकों को पूरी सफाई के साथ कम-से-कम समयावधि में हाईजैनिक फास्ट फूड उपलब्ध करवा रहे हैं। 15 हजार लोग हर रोज 4.70 करोड़ लोगों को हैंबर्गर्स, चीज बर्गर्स, चिकन प्रोडक्ट्स, फ्रेंच फ्राइज, सॉफ्ट ड्रिंक्स, मिल्क शेक्स, सलाद, डेजर्टस, फ्रूट्स, वेज व नॉनवेज ब्रेकफास्ट डिशेस सर्व कर रहे हैं। इनकी सालाना बिक्री 23 अरब डॉलर (जनवरी 2008) से ज्यादा है।

दुनिया भर में पहुँचा, भारत को भी भाया

अमेरिका ने सन् 1988 में भारत में मैकडॉनल्ड्स शृंखला स्थापित करने का निर्णय लिया, पर पहला रेस्त्राँ आठ साल बाद स्थापित किया। 6 साल तक रिसर्च की गई कि भारत के खाद्य पदार्थों के नियम-कानून और भारतीय ग्राहकों के बीच मान्य फास्ट फूड कैसे होना चाहिए। सन् 1994 में संयुक्त वेंचर के लिए दो भागीदार खोजे गए। तद्नुसार 50ः50 फीसदी भागीदारी के साथ मैकडॉनल्ड इंडिया जनमी, जिसमें पैरेंट कंपनी के दो भागीदार हैंङ्तएक हार्ड केस्टल रेस्त्राँ प्रा.लि. के अमित भाटिया जो दक्षिण व पश्चिमी भारत में मैकडॉनल्ड्स रेस्त्राँ शृंखला का संचालन करते हैं। दूसरे कनॉट प्लाजा प्रा.लि. के विक्रम बक्शी, जिनका कार्यक्षेत्र है उत्तर व पूर्वी भारत।

गौरतलब है कि इन भारतीय फ्रेंचाइजीस का दावा है कि मैकडॉनल्ड्स की शाकाहारी डिशेस शत प्रतिशत शाकाहारी है, जिनका किचन इक्विपमेंट्स बरतन भी अलग हैं। मैकडॉनल्ड्स भारत आई, तब ही फैसला हो गया था कि यहाँ गोमांस से बने हैंबर्गर और बर्गर सर्व नहीं किए जाएँगे। मैकडॉनल्ड्स इंडिया का भारतीय परंपरा व स्थानीय ग्राहकों के स्वाद के अनुरूप मैन्यू सन् 1999 में बनाया गया और कई नई फास्ट फूड डिशेस जनमी, जैसे मेकरेप, मेक टिक्की बर्गर, भेलपुरी, बड़ा पाव, भजिया, पकौड़ा, मेक आलू, टिक्की बर्गर या मेकवेजी। यही नहीं, इनका 95 फीसदी कच्चा माल भी भारत से ही खरीदा जाता है, जबकि अन्य देशों में स्थित मैकडॉनल्ड्स रेस्त्राँ 30 से 40 फीसदी कच्चा माल ही स्थानीय स्तर पर खरीद रहे हैं, शेष आयात करते हैं। मैकडॉनल्ड्स इंडिया प्रतिदिन 3 लाख से ज्यादा भारतीयों को फास्ट फूड डिशेस सर्व कर रहा है। मैकडॉनल्ड्स इंडिया के भारतीय भागीदार कहते हैं कि हमने मैकडॉनल्ड्स की विश्वव्यापी रेस्त्राँ शृंखला को कई नई वेज डिशेस बनाया व सर्व करना सिखाया है।

पसंद पर खरी क्वालिटी

मैकडॉनल्ड्स का दावा है कि 20 चेक पॉइंट्स पर गहन जाँच-पड़ताल के बाद ही हर उत्पाद ‘फर्स्ट-इन फर्स्ट आउट’ आधार पर लोगों को सर्व किया जाता है। इन्हें पकाने में स्टेट ऑफ आर्ट कुकिंग उपकरण उपयोग किए जाते हैं। प्रत्येक कर्मचारी को फूड हैंडलिंग व फूड सेफ्टी की ट्रेनिंग दी जाती है। फास्ट फूड्स की कई डिशेस मैकडॉनल्ड्स की देन हैं।

कीर्तिमान के साथ परोपकार भी

मैकडॉनल्ड्स ने एक ही वर्ष (सन् 1984) में 5 करोड़ हैंबर्गर्स बेचने का कीर्तिमान बनाया है। मैकडॉनल्ड्स ने सन् 1961 में शिकागो में हैंबर्गर यूनिवर्सिटी स्थापित की तो सन् 1983 में इलीनॉय में 80 एकड़ भूखंड पर न्यू हैंबर्गर यूनिवर्सिटी जनमी जहाँ मैकडॉनल्ड्स स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी जाती है। सन् 1984 में मैकडॉनल्ड्स कॉर्पोरेशन ने अपने संस्थापक रेमंड क्रॉक की स्मृति में एक चिल्ड्रन चैरिटी ट्रस्ट स्थापित किया है। रेमंड क्रॉक द्वारा सन् 1955 में इलीनॉय में स्थापित पहला फ्रेंचाइजी रेस्त्राँ अब म्यूजियम बना दिया गया है। मैकडॉनल्ड्स ने एक ही वर्ष (सन् 1984) में 5 करोड़ हैंबर्गर्स बेचने का कीर्तिमान बनाया है। मैकडॉनल्ड्स ने सन् 1961 में शिकागो में हैंबर्गर यूनिवर्सिटी स्थापित की तो सन् 1983 में इलीनॉय में 80 एकड़ भूखंड पर न्यू हैंबर्गर यूनिवर्सिटी जनमी जहाँ मैकडॉनल्ड्स स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी जाती है। सन् 1984 में मैकडॉनल्ड्स कॉर्पोरेशन ने अपने संस्थापक रेमंड क्रॉक की स्मृति में एक चिल्ड्रन चैरिटी ट्रस्ट स्थापित किया है। रेमंड क्रॉक द्वारा सन् 1955 में इलीनॉय में स्थापित पहला फ्रेंचाइजी रेस्त्राँ अब म्यूजियम बना दिया गया है।

A new twist !

For over 600 years, papers were clipped together by putting ribbon through parallel incision in the upper left hand corner of the pages. Finally in 1835, the straight pin invented by Howe provided an alternative. But it was  a Norwegian inventor and patent clerk Johan Valeer who created the paper clip in 1901 and gave a much-needed twist to the loop papers saga. A simple piece of wire bent at the ends, that holds the sheets together perfectly.

Simple but effective ! Isn’t it ?  THINK PRACTICAL

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Prakash Biyani

Author: Prakash Biyani

कॉरपोरेट इतिहासकार प्रकाश बियानी की यह ग्यारहवीं पुस्तक है। श्री बियानी की पूर्व प्रकाशित पुस्तकों में बहुपठित हैं—‘शून्य से शिखर’, ‘जी! वित्तमंत्री जी’, ‘इस्पात पुरुष लक्ष्मी मित्तल’, ‘इंडियन बिजनेस वुमेन’, ‘25 सुपर ब्रांड्स’ एवं ‘खदान से ख्वाबों तक संगमरमर’। बिजनेस वर्ल्ड पर हिंदी में पहली बार प्रकाशित इन पुस्तकों को प्रबुद्ध पाठकों, विशेषकर बी-स्कूल के छात्रों ने खूब सराहा है। उनकी पुस्तकों के गुजराती, मराठी संस्करण भी लोकप्रिय हुए हैं। ‌किशोर उम्र से लेखन कार्य कर रहे श्री बियानी ने 25 वर्ष (1968-93) भारतीय स्टेट बैंक में महत्वपूर्ण दायित्व सँभालने के बाद दस वर्ष (1994-2003) भास्कर समूह में कॉरपोरेट संपादक का दायित्व सँभाला है। उनके दो हजार से ज्यादा लेख, साक्षात्कार विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। सन् 2003 से फ्रीलांस लेखक के रूप में कार्यरत श्री बियानी विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं के निय‌िमत स्तंभ लेखक भी हैं।

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