Sat. Feb 16th, 2019

एक्वागार्ड – स्वस्थ जिंदगी का पानी एक्वागार्ड

क्वागार्ड ऐसा ब्रांड है, जो किसी उत्पाद से पहले एक सोच को बेचता है। यह सोच है शुद्ध व सुरक्षित पानी, यानी स्वस्थ और खुशहाल जिंदगानी। दिलचस्प बात यह है कि हम सब इस बात को जानते और मानते हैं, पर शुद्ध जल पर खर्च करने से बचते हैं। हम सोचते हैं कि यह सरकार की जवाबदारी है कि वह घर-घर तक पहुँचाए साफ-स्वच्छ सुरक्षित पानी।

विधाता की स्वचलित जल उद्जन प्रणाली (ऑटो रन हाइड्रोलॉजिकल सायकल) अद्भुत है। इससे ही हमें समुद्र से हर साल खरबों लीटर पानी मिलता है; पर इसमें होते हैंङ्तपारा, सीसा, संखिया, सूक्ष्म जीव-जंतु, घुलनशील ठोस, वेस्ट, ऑर्गेनिक कंपाउंड्स और बैक्टीरिया जैसे कई जहर।

– Because water sustains all life, the premier brand and logo value of Aquagaurd is trust that takes on a spiritual dimension. The company’s vision has expanded beyond quality, beyond simply innovation and service, to encompass expertise in recommending the right solution for specific customer needs. No other brand comes close. Aquaguard is truly a brand for the changing times and continues to remain a symbol of sustainable modern living. Aquaguard has unmatched expertise in five water purification technologies and over twenty product solutions that address more than seventeen diverse water conditions.

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स पर शुद्धीकरण के बाद यह पानी हमारे घर पहुँचता है। यह साफ दिखता है, पर शुद्ध नहीं होता। यूनाइटेड नेशंस की इकोनॉमिक ऐंड सोशल राइट्स कमेटी के अनुसार, शुद्ध व सुरक्षित पेयजल मानवाधिकार है, जिसका सारी दुनिया में उल्लंघन हो रहा है। अविकसित और विकासशील देशों में हर साल लाखों लोग, खासकर बच्चे, अशुद्ध पेयजल के कारण असमय मर रहे हैं। 40 साल पहले इस निष्कर्ष को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए हमारे देश में एक्वागार्ड जनमा था, जो शुद्ध पानी का वैसा ही पर्याय बन गया है, जैसेङ्तवनस्पति यानी डालडा। 7 करोड़ लीटर से ज्यादा एक्वागार्ड वाटर आज हम लोग इस विश्वास के साथ पी रहे हैं कि अब जलजनित संपूर्ण रोगों से बच जाएँगे।

एक्वागार्ड की जनक है यूरेका फोर्ब्स लिमिटेड, जिसकी सन् 1982 में टाटा संस की फोर्ब्स गोकक लिमिटेड और स्वीडन की इलेक्ट्रोलक्स ने स्थापना की थी। शपूरजी पैलोनजी मिस्त्री ने सन् 2002-03 में फोर्ब्स गोकक में टाटा संस की हिस्सेदारी खरीद ली। कुछ दिनों बाद इलेक्ट्रोलक्स ने भी इस संयुक्त वेंचर को छोड़ दिया, तो यूरेका फोर्ब्स शपूरजी पैलोनजी ग्रुप के संपूर्ण नियंत्रण में आ गई। शपूरजी पैलोनजी मिस्री आज फोर्ब्स गोकक के चेयरमैन हैं, पर एक्वागार्ड ब्रांड के प्रमोटर हैं सुरेश गोकलने, जो कंपनी के वाइस चेयरमैन हैं। इसके पहले वे करीब दो दशक तक ब्रांड मैनेजर रहे हैं। इस हैसियत से उन्होंने ही वाटर प्यूरीफायर के पहले यह सोच बेची कि शुद्ध पेयजल यानी स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी।

इस अद्भुत मार्केटिंग रणनीति का सुफल मिला। आज एक्वागार्ड ऐसा वाटर प्यूरीफायर ब्रांड है, जिसे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मान्य करता है। ‘रीडर्स डाइजेस्ट’ की पान एशिया कस्टमर स्टडी ने एक्वागार्ड को दो बार प्लेटिनम ब्रांड का दर्जा दिया है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में इस ब्रांड की सक्सेस स्टोरी एक केस स्टडी के रूप में पढ़ाई जाती है। विश्वविख्यात मार्केटिंग गुरु फिलिप कोटलर ने अपनी पुस्तक ‘मार्केटिंग मैनेजमेंट’ में इसका उल्लेख किया है। यह पुस्तक मार्केटिंग प्रोफेशनल्स की बाइबिल है। यूरेका फोर्ब्स को एशिया मेक व इंडिया मेक अवॉर्ड्स मिले हैं। ये अवॉर्ड्स एशिया महाद्वीप में नॉलेज चैंपियन माने जाते हैं। एक्वागार्ड के कारण ही फोर्ब्स शोकक को यूनेस्को वाटर डाइजेस्ट अवॉर्ड 2007-08 मिला और कहा गया कि कंपनी जो डोमेस्टिक वाटर सॉल्युशंस प्रदान करती है, उन्होंने करोड़ों लोगों को जलजनित रोगों से बचाया है।

सरकार लाख कोशिश करे, पर देश की 100 करोड़ से ज्यादा आबादी को शुद्ध पेयजल नहीं उपलब्ध करवा सकती, हालाँकि जानती है कि 80 फीसदी संक्रामक रोगों का कारण है अशुद्ध पेयजल। फोर्ब्स शोकक का दावा है कि एक्वागार्ड वाटर उतना ही शुद्ध है जितना 20 मिनट तक उबाला गया पानी, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पेयजल के रूप में मान्य किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि उसके आर. ऐंड डी. विभाग ने जो जल शुद्धीकरण तकनीक विकसित की है, वह इतनी संपूर्ण है कि किसी भी स्रोत (नदी, तालाब, बोरवेल, टंकी या ओवरहेड टैंक) का कैसा भी प्रदूषित जल हो, उसे एक्वागार्ड सुरक्षित पेयजल में बदल देता है। इनमें उल्लेखनीय है, इंटरनेशनल टेक्नोलॉजी जैसे नानो-सिल्वर, एंटी माइक्रोबिलय प्रोटेक्शन, अल्ट्राफिल्ट्रेशन से लेकर मानव स्वास्थ्य के हितकारी खनिजों की रक्षा-सुरक्षा करनेवाली मिनरल प्रिजर्वेशन तकनीक (खनिज सुरक्षा तकनीक)। बी.एल.डब्ल्यू.-जी टेक्नोलॉजीयुक्त टोटल सेंसा तो भारतीय परिवारों के लिए सर्वथा उपयुक्त है, जिनके जलस्रोत हर सप्ताह और कभी-कभी तो हर रोज बदल जाते हैं। टोटल सेंसा इतनी बुद्धिमान तकनीक है कि यह जल की नस्ल पहचानकर उसके शुद्धीकरण का तरीका खुद ही चुन लेती है। कंपनी का एक और प्रोडक्ट हैङ्तदुनिया का पहला गोल्ड स्टैंडर्ड वाटर प्यूरीफायर, जिसे पेटेंटेड परिस्थितिजनक शुद्धीकरण प्रणाली के अलावा श्योर टेक्नोलॉजी का भी पेटेंट मिला हुआ है। यह टेक्नोलाजी पेस्टिसाइड, इंडिस्ट्रयल वेस्ट, आर्गेनिक कंपाउंड्स व सीसा के दुष्प्रभाव को समाप्त करती है। सुरेश गोकलने का कहना है कि आगामी दो-तीन सालों में हम ऐसी जल शुद्धीकरण तकनीक खोज लेंगे, जो 10 पैसे प्रति लीटर लागत पर देश की ग्रामीण आबादी को ऐसा शुद्ध जल उपलब्ध करवाएगी, जो उन्हें आंत्रशोथ (ग्रेस्टो इंटेरिका), हेपेटाइटिस, पोलियो, डायरिया जैसे रोगों से बचाएगा।

भारतीय उपभोक्ता को केवल तकनीक को प्रमोट करके कोई उत्पाद नहीं बेचा जा सकता। उनकी खरीद का एक पैमाना मूल्य है। इस मार्केटिंग सोच को यूरेका फोर्ब्स ने समझा और 1,800 रुपए से 18,000 रुपए मूल्य रेंज के वाटर प्यूरीफायर लॉञ्च किए, तो उनको सबसे अलग अंदाज में प्रमोट भी किया। जी हाँ, एक्वागार्ड घर-घर तक पहुँचे ‘यूरे चेंपस’ के जरिए, जो इसके डायरेक्ट सेल स्टाफ का ‘निकनेम’ है। यूरे चेंपस एशिया का सबसे बड़ा डायरेक्ट सेल्स नेटवर्क है, जो हर साल 6 करोड़ भारतीय परिवार यानी प्रतिदिन 1,500 रसोईघरों तक सीधे पहुँचता है।

इनके सहयोगी हैं 200 से ज्यादा देशव्यापी कस्टमर रिस्पांस सेंटर, 1,000 से ज्यादा बिक्री बाद सेवा साझेदार और 6,000 सर्विस टेक्नोक्रेट्स, जो घर-घर पहुँचकर वाटर प्यूरीफायर की देखरेख करते हैं। इतनी व्यापक मार्केटिंग रणनीति का ही सुफल है कि केंट, उषा ब्रिटा, अल्फा, एच.यू.एल., पोलर जैसे एक दर्जन से ज्यादा प्रतिद्वंद्वियों पर भारी है एक्वागार्ड।

‘फोर्ब्स गोकक लिमिटेड’ घरेलू व वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए सिक्यूरिटी सॉल्युशंस एवं यूरोक्लीन ब्रांड नाम से क्लीनिंग उपकरण के साथ क्लीनिंग व हायजिन उत्पाद भी बनाती व बेचती है। कंपनी अपने उत्पादों व सेवाओं के प्रमोशन के लिए प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सशुल्क सहयोग प्राप्त करती है, तो ऑनलाइन प्रमोशन भी करती है। यूरेका फोर्ब्स सामाजिक जवाबदारी के निर्वहण में भी पीछे नहीं है। हालाँकि, ऐसी सारी गतिविधियों का निहितार्थ है शुद्ध व सुरक्षित जल के प्रति जन-चेतना जाग्रत् करना। इस मंशा से कंपनी स्कूल-कॉलेज, विकलांगों के संस्थानों, झोंपड़-पट्टी व ग्रामीण क्षेत्रों के समाज-सेवा संगठनों को निःशुल्क वाटर प्यूरीफायर प्रदान करती है। सन् 2004 में सुनामी से प्रभावित लोगों के लिए कंपनी ने सेल्फ वाटर हेल्पलाइन स्थापित की थी। यूरो इन्वायरो क्विज ने 5 लाख से ज्यादा छात्रों को शुद्ध पेयजल व शुद्ध पर्यावरण के प्रति चैतन्य किया है। यूरो स्कूल ऑफ एन्वायरमेंट और यूरो रेनवाटर हार्वेस्टिंग के अलावा ‘नाना-नानी पार्क’ भी दिलचस्प पहल है, जिसने भारतीय महिलाओं को विश्वास दिलाया है कि एक्वागार्ड वाटर उनके परिवार के लिए लक्जरी नहीं, वैसे ही जरूरी है, जैसे चिकित्सक या औषधियाँ।

ऊँचाइयों पर पहँुचनेवाले बाधाओं से नहीं डरते। बाज के आसानी से तेज गति से उड़ने की राह में इकलौती बाधा हवा है, पर हवा न हो तो बाज उड़ भी नहीं सकता। वह तत्काल जमीन पर गिर जाएगा। उड़ने की शर्त ही उड़ने में बाधा भी है। जो ऊँचाई पर पहुँचना चाहते हैं, वे बाधाओं से नहीं डरते।

 

Prakash Biyani

Author: Prakash Biyani

कॉरपोरेट इतिहासकार प्रकाश बियानी की यह ग्यारहवीं पुस्तक है। श्री बियानी की पूर्व प्रकाशित पुस्तकों में बहुपठित हैं—‘शून्य से शिखर’, ‘जी! वित्तमंत्री जी’, ‘इस्पात पुरुष लक्ष्मी मित्तल’, ‘इंडियन बिजनेस वुमेन’, ‘25 सुपर ब्रांड्स’ एवं ‘खदान से ख्वाबों तक संगमरमर’। बिजनेस वर्ल्ड पर हिंदी में पहली बार प्रकाशित इन पुस्तकों को प्रबुद्ध पाठकों, विशेषकर बी-स्कूल के छात्रों ने खूब सराहा है। उनकी पुस्तकों के गुजराती, मराठी संस्करण भी लोकप्रिय हुए हैं। ‌किशोर उम्र से लेखन कार्य कर रहे श्री बियानी ने 25 वर्ष (1968-93) भारतीय स्टेट बैंक में महत्वपूर्ण दायित्व सँभालने के बाद दस वर्ष (1994-2003) भास्कर समूह में कॉरपोरेट संपादक का दायित्व सँभाला है। उनके दो हजार से ज्यादा लेख, साक्षात्कार विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। सन् 2003 से फ्रीलांस लेखक के रूप में कार्यरत श्री बियानी विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं के निय‌िमत स्तंभ लेखक भी हैं।

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